0013 : आह! वह प्यारी सलीब
Tune: On a hill far away आह! वह प्यारी सलीब मुझको दीख पड़ती है एक पहाड़ी पर जो खड़ी थी, कि मसीह-ए-मसलूब ने नदामत उठा, गुनाहगारों की खातिर जान दी। कोः-पास न छोडूंगा प्यारी सलीब जब तक दुनिया में होगा कयाम लिपटा रहूंगा मैं उसी से कि मसलूब में है अब्दी आराम। 1.आह! वह प्यारी सलीब जिसकी होती तहकीर है मुझको बेहद दिल पंजीर, कि खुदा के महबूब और जलाली मसीह ने पहुंचाया उसे कलवरी। 2. मुझे प्यारी सलीब में जो लहू-लुहान नज़र आती है खूबसूरती, कि खुदा के मसीह ने कफ्फारा दिया ताकि मिले मुझे जिन्दगी । 3. मैं उस प्यारी सलीब का रहूं वफादार सिपाही हमेशा ज़रुर, जब तक मेरा मसीह न करेगा मुझे अपने अब्दी जलाल में मंजूर।