0006 : जो क्रूस पे कुरबान है
जो क्रूस पे कुरबान है, वो मेरा मसीहा है, हर ज़ख्म जो उसका है, वह मेरे गुनाह का है। 1. इस दुनिया में ले आये, मेरे ही गुनाह उसको ये जुल्म सितम उस पर, मैंने ही कराया है । 2. इन्सान है वह कामिल, और सच्चा खुदा वह है, वह प्यार का दरिया है, सच्चाई का रास्ता है । 3. देने को मुझे जीवन, खुद मौत सही उसने क्या खूब है कुरबानी, क्या प्यार अनेाखा है ।