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पाठ 21 : बाबुल में बंधुआई



सारांश

यहूदा के अंतिम तीन राजा यहोयाकीम, यहोयाकीन और सिदिकिय्याह थे। यहोयाकीम ने ग्यारह वर्ष राज्य किया। यहोयाकिन का राज्य केवल तीन महीने का रहा। फिर यहोयाकीन के चाचा सिदिकिय्याह ने ग्यारह वर्ष राज्य किया। यहोयाकिम ने परमेश्वर के विरुद्ध पाप किया। उसने यिर्मयाह के माध्यम से परमेश्वर द्वारा दी गई चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया (यिर्मयाह 36)। यहोयाकीम के शासनकाल के तीसरे वर्ष में नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम पर तीसरी बार घेरा डाला। बेबीलोन की सेना द्वारा घेरे जाने पर शहर ने उन्हें समर्पित कर दिया। और शहर का काफी खजाना बेबीलोन ले जाया गया। कई लोगों को बंदी बना लिया गया दस वर्षों के बाद जब सिदिकिय्याह, जो यहोयाकीम का भाई था यहूदा का राजा हुआ जब नबूकदनेस्सर ने फिर से यरूशलेम के विरुद्ध हमला किया। उसने सिदिकिय्याह की आखें निकाल ली, और उसे बांधकर बेबीलोन ले गया। बेबीलोनियों ने यरूशलेम के मंदिर और महत्वपूर्ण इमारतों में आग लगा दिया। उन्होंने फिर से कई लोगों को बंधुआई में बेबीलोन ले गए । इस प्रकार यहूदा, इस्त्राएल के समान बंधुआई में चला गया। यरूशलेम पर पहली चढ़ाई के बाद नबूकदनेस्सर ने शाही परिवार के पुत्रों में से जवान पुरुषों को चुना जो बुद्धिमान, स्वस्थ और दिखने में सुंदर थे जो बेबीलोन के राजा के महल मे खड़े रह सकें। उन्हें बेबीलोन की भाषा और साहित्य सिखाया गया। इन जवानों में दानिय्येल और उसके मित्र हनन्याह, मीशाएल, अजर्याह थे। उनके नाम बदलकर बेलशस्सर, शदरक, मेशक और अबेदनगो रखा गया। उनके अपने नाम जीवित परमेश्वर के नाम से जुड़े थे, परंतु इन मूर्तिपूजकों ने उन्हें उनके अन्यजातीय ईश्वरों से संबंधित नाम दिया। उन्होंने ऐसा इसलिये किया होगा कि ये लड़के अपने परमेश्वर को भूल जाएँ और उनके बेबीलोन के ईश्वरों की सेवा करे। बेबीलोनियों ने न केवल यहूदी लड़कों के नाम बदले परंतु उन्हें राजा की मेज के भोज और दाखमधु भी दिया। वह स्वादिष्ट भोजन था और खाने के पहले हमेशा मूर्तियों को चढ़ाया जाता था। तब दानिय्येल ने अपने मन मे ठान लिया कि वह ऐसा भोजन खाकर और दाखमधु पीकर स्वयँ को अपवित्र नहीं करेगा। दानिय्येल ने वहाँ की प्रथाओं का भी पालन नहीं किया। वह परमेश्वर की संतान था, और कोई भी कार्य कोई बिना सोचे नहीं करता था यहाँ तक कि खाना भी यह बिना सोचे नही खाता था कि क्या यह प्रसन्न करेगा? हमारे जीवन में भी ऐसे समय आएंगे जब संगती करने और सहायता के लिये हमारे पास परमेश्वर की अन्य संताने नहीं रहेगी। तब भी हमें हिम्मत रखनी चाहिये जब भी हम परीक्षा का सामना करें, स्थिर रहें और यह दिखाएँ कि हम प्रभु यीशु के सेवक हैं दानिय्येल ने अपने इस निर्णय के विषय अपने मित्रों को बताया। वे भी उनके साथ हो लिये और राजा के भंडारी से कहकर सादा भोजन खाने की अनुमति प्राप्त कर ली। उसने दस दिनों की परख के लिये अनुमति दी। जब जांच का समय आया तो वे ज्यादा स्वस्थ दूसरे जवान पुरुषों से बेहतर निकले जो राजा का भोजन खाते थे। परमेश्वर उसके बच्चों की विशेष देखभाल किया था, जिन्होंने उसका भय माना था। दानिय्येल ने जो अच्छा निर्णय लिया था उसे उसने जीवनभर अपने मन में रखा। वह राज्य के सर्वोच्च पद तक ऊँचा उठा। वह मनुष्यों के सामने महान था, और राजा भी उसे ‘‘अतिप्रिय’’ कहता था (दानिय्येल 9:23)। परमेश्वर आपको भी जब अभी आप छोटे हैं अच्छे निर्णय लेने में सहायता करें ताकि आप अपने निर्णयों के अनुसार जी सकें जैसे दानिय्येल ने किया था दानिय्येल - परमेश्वर न्यायी है। बेलशस्सर - बेल का राजकुमार (बेल बेबीलोन की एक देवी थी)। हनन्याह - याह दयालू है। शदरक - सूर्य देवता द्वारा प्रदीप्त मीशाएल - वही है जो परमेश्वर है। मेशक - ‘‘शेश’’ शेशक की एक देवी को बताता है (यिर्मयाह 25ः26; 51ः41)। अजर्याह - याह बचानेवाला है। अबेदनगो - नेगो का दास


बाइबल अध्यन

2 इतिहास अध्याय 36 तब देश के लोगों ने योशिय्याह के पुत्र यहोआहाज को ले कर उसके पिता के स्थान पर यरूशलेम में राजा बनाया। 2 जब यहोआहाज राज्य करने लगा, तब वह तेईस वर्ष का था, और तीन महीने तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। 3 तब मिस्र के राजा ने उसको यरूशलेम में राजगद्दी से उनार दिया, और देश पर सौ किक्कार चान्दी और किक्कार भर लोना जुरमाने में दण्ड लगाया। 4 तब मिस्र के राजा ने उसके भाई एल्याकीम को यहूदा और यरूशलेम का राजा बनाया और उसका नाम बदल कर यहोयाकीम रखा। और नको उसके भाई यहोआहाज को मिस्र में ले गया। 5 जब यहोयाकीम राज्य करने लगा, तब वह पच्चीस वर्ष का था, और ग्यारह वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। और उसने वह काम किया, जो उसके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में बुरा है। 6 उस पर बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर ने चढ़ाई की, और बाबेल ले जाने के लिये उसको बेडिय़ां पहना दीं। 7 फिर नबूकदनेस्सर ने यहोवा के भवन के कुछ पात्र बाबेल ले जा कर, अपने मन्दिर में जो बाबेल में था, रख दिए। 8 यहोयाकीम के और काम और उसने जो जो घिनौने काम किए, और उस में जो जो बुराइयां पाई गई, वह इस्राएल और यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखी हैं। और उसका पुत्र यहोयाकीन उसके स्थान पर राज्य करने लगा। 9 जब यहोयाकीन राज्य करने लगा, तब वह आठ वर्ष का था, और तीन महीने और दस दिन तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। और उसने वह किया, जो परमेश्वर यहोवा की दुष्टि में बुरा है। 10 नये वर्ष के लगते ही नबूकदनेस्सर ने लोगों को भेज कर, उसे और यहोवा के भवन के मनभावने पात्रों को बाबेल में मंगवा लिया, और उसके भाई सिदकिय्याह को यहूदा और यरूशलेम पर राजा नियुक्त किया। 11 जब सिदकिय्याह राज्य करने लगा, तब वह इक्कीस वर्ष का था, और यरूशलेम में ग्यारह वर्ष तक राज्य करता रहा। 12 और उसने वही किया, जो उसके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में बुरा है। यद्यापि यिर्मयाह नबी यहोवा की ओर से बातें कहता था, तौभी वह उसके साम्हने दीन न हुआ। 13 फिर नबूकदनेस्सर जिसने उसे परमेश्वर की शपथ खिलाई थी, उस से उस ने बलवा किया, और उस ने हठ किया और अपना मन कठोर किया, कि वह इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की ओर न फिरे। 14 वरन सब प्रधान याजकों ने और लोगों ने भी अन्य जातियों के से घिनौने काम कर के बहुत बड़ा विश्वासघात किया, और यहोवा के भवन को जो उसने यरूशलेम में पवित्र किया था, अशुद्ध कर डाला। 15 और उनके पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने बड़ा यत्न कर के अपने दूतों से उन के पास कहला भेजा, क्योंकि वह अपनी प्रजा और अपने धाम पर तरस खाता था; 16 परन्तु वे परमेश्वर के दूतों को ठट्ठों में उड़ाते, उस के वचनों को तुच्छ जानते, और उसके नबियों की हंसी करते थे। निदान यहोवा अपनी प्रजा पर ऐसा झुंझला उठा, कि बचने का कोई उपाय न रहा। 17 तब उसने उन पर कसदियों के राजा से चढ़ाई करवाई, और इस ने उनके जवानों को उनके पवित्र भवन ही में तलवार से मार डाला। और क्या जवान, क्या कुंवारी, क्या बूढ़े, क्या पक्के बाल वाले, किसी पर भी कोमलता न की; यहोवा ने सभों को उसके हाथ में कर दिया। 18 और क्या छोटे, क्या बड़े, परमेश्वर के भवन के सब पात्र और यहोवा के भवन, और राजा, और उसके हाकिमों के खजाने, इन सभों को वह बाबेल में ले गया। 19 और कसदियो ने परमेश्वर का भवन फूंक दिया, और यरूशलेम की शहरपनाह को तोड़ ड़ाला, और आग लगा कर उसके सब भवनों को जलाया, और उस में का सारा बहुमूल्य सामान नष्ट कर दिया। 20 और जो तलवार से बच गए, उन्हें वह बाबेल को ले गया, और फारस के राज्य के प्रबल होने तक वे उसके और उसके बेटों-पोतों के आधीन रहे। 21 यह सब इसलिये हुआ कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था, वह पूरा हो, कि देश अपने विश्राम कालों में सुख भोगता रहे। इसलिये जब तक वह सूना पड़ा रहा तब तक अर्थात सत्तर वर्ष के पूरे होने तक उसको विश्राम मिला। 22 फारस के राजा कूस्रू के पहिले वर्ष में यहोवा ने उसके मन को उभारा कि जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था, वह पूरा हो। इसलिये उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया, और इस आशय की चिट्ठियां लिखवाईं, 23 कि फारस का राजा कू्स्रू कहता है, कि स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा ने पृथ्वी भर का राज्य मुझे दिया है, और उसी ने मुझे आज्ञा दी है कि यरूशलेम जो यहूदा में है उस में मेरा एक भवन बनवा; इसलिये हे उसकी प्रजा के सब लोगो, तुम में से जो कोई चाहे कि उसका परमेश्वर यहोवा उसके साथ रहे, तो वह वहां रवाना हो जाए। दानिय्येल अध्याय 1 यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के तीसरे वर्ष में बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यरूशेलम पर चढ़ाई कर के उसको घेर लिया। 2 तब परमेश्वर ने यहूदा के राजा यहोयाकीम को परमेश्वर के भवन के कई पात्रों सहित उसके हाथ में कर दिया; और उसने उन पात्रों को शिनार देश में अपने देवता के मन्दिर में ले जा कर, अपने देवता के भण्डार में रख दिया। 3 तब उस राजा ने अपने खोजों के प्रधान अशपनज को आज्ञा दी कि इस्राएली राजपुत्रों और प्रतिष्ठित पुरूषों में से ऐसे कई जवानों को ला, 4 जो निर्दोष, सुन्दर और सब प्रकार की बुद्धि में प्रवीण, और ज्ञान में निपुण और विद्वान् और राजमन्दिर में हाजिर रहने के योग्य हों; और उन्हें कसदियों के शास्त्र और भाषा की शिक्षा दे। 5 और राजा ने आज्ञा दी कि उसके भोजन और पीने के दाखमधु में से उन्हें प्रतिदिन खाने-पीने को दिया जाए। इस प्रकार तीन वर्ष तक उनका पालन पोषण होता रहे; तब उसके बाद वे राजा के साम्हने हाजिर किए जाएं। 6 उन में यहूदा की सन्तान से चुने हुए, दानिय्येल, हनन्याह, मीशाएल, और अजर्याह नाम यहूदी थे। 7 और खोजों के प्रधान ने उनके दूसरे नाम रखे; अर्थात दानिय्येल का नाम उसने बेलतशस्सर, हनन्याह का शद्रक, मीशाएल का मेशक, और अजर्याह का नाम अबेदनगो रखा॥ 8 परन्तु दानिय्येल ने अपने मन में ठान लिया कि वह राजा का भोजन खाकर, और उसके पीने का दाखमधु पीकर अपवित्र न होए; इसलिये उसने खोजों के प्रधान से बिनती की कि उसे अपवित्र न होना पड़े। 9 परमेश्वर ने खोजों के प्रधान के मन में दानिय्येल के प्रति कृपा और दया भर दी। 10 और खोजों के प्रधान ने दानिय्येल से कहा, मैं अपने स्वामी राजा से डरता हूं, क्योंकि तुम्हारा खाना-पीना उसी ने ठहराया है, कहीं ऐसा न हो कि वह तेरा मुंह तेरे संगी के जवानों से उतरा हुआ और उदास देखे और तुम मेरा सिर राजा के साम्हने जाखिम में डालो। 11 तब दानिय्येल ने उस मुखिये से, जिस को खोजों के प्रधान ने दानिय्येल, हनन्याह, मीशाएल, और अजर्याह के ऊपर देखभाल करने के लिये नियुक्त किया था, कहा, 12 मैं तेरी बिनती करता हूं, अपने दासों को दस दिन तक जांच, हमारे खाने के लिये सागपात और पीने के लिये पानी ही दिया जाए। 13 फिर दस दिन के बाद हमारे मुंह और जो जवान राजा का भोजन खाते हैं उनके मुंह को देख; और जैसा तुझे देख पड़े, उसी के अनुसार अपने दासों से व्यवहार करना। 14 उनकी यह बिनती उसने मान ली, और दास दिन तक उन को जांचता रहा। 15 दस दिन के बाद उनके मुंह राजा के भोजन के खाने वाले सब जवानों से अधिक अच्छे और चिकने देख पड़े। 16 तब वह मुखिया उनका भोजन और उनके पीने के लिये ठहराया हुआ दाखमधु दोनों छुड़ा कर, उन को सागपात देने लगा॥ 17 और परमेश्वर ने उन चारों जवानों को सब शास्त्रों, और सब प्रकार की विद्याओं में बुद्धिमानी और प्रवीणता दी; और दानिय्येल सब प्रकार के दर्शन और स्वपन के अर्थ का ज्ञानी हो गया। 18 तब जितने दिन के बाद नबूकदनेस्सर राजा ने जवानों को भीतर ले आने की आज्ञा दी थी, उतने दिन के बीतने पर खोजों का प्रधान उन्हें उसके सामने ले गया। 19 और राजा उन से बातचीत करने लगा; और दानिय्येल, हनन्याह, मीशाएल, और अजर्याह के तुल्य उन सब में से कोई न ठहरा; इसलिये वे राजा के सम्मुख हाजिर रहने लगे। 20 और बुद्धि और हर प्रकार की समझ के विषय में जो कुछ राजा उन से पूछता था उस में वे राज्य भर के सब ज्योतिषयों और तन्त्रियों से दस गुणे निपुण ठहरते थे। 21 और दानिय्येल कुस्रू राजा के पहिले वर्ष तक बना रहा॥ भजन 85:6 6 क्या तू हम को फिर न जिलाएगा, कि तेरी प्रजा तुझ में आनन्द करे? यिर्मयाह 36 अध्याय 36 फिर योशिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के चौथे बरस में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, 2 एक पुस्तक ले कर जितने वचन मैं ने तुझ से योशिय्याह के दिनों से ले कर अर्थात जब मैं तुझ से बातें करने लगा उस समय से आज के दिन तक इस्राएल और यहूदा और सब जातियों के विषय में कहे हैं, सब को उस में लिख। 3 क्या जाने यहूदा का घराना उस सारी विपत्ति का समाचार सुन कर जो मैं उन पर डालने की कल्पना कर रहा हूँ अपनी बुरी चाल से फिरे और मैं उनके अधर्म और पाप को क्षमा करूं। 4 सो यिर्मयाह ने नेरिय्याह के पुत्र बारूक को बुलाया, और बारूक ने यहोवा के सब वचन जो उसने यिर्मयाह से कहे थे, उसके मुख से सुन कर पुस्तक में लिख दिए। 5 फिर यिर्मयाह ने बारूक को आज्ञा दी और कहा, मैं तो बन्धा हुआ हूँ, मैं यहोवा के भवन में नहीं जा सकता। 6 सो तु उपवास के दिन यहोवा के भवन में जा कर उसके जो वचन तू ने मुझ से सुन कर लिखे हैं, पुस्तक में से लोगों को पढ़ कर सुनाना, और जितने यहूदी लोग अपने अपने नगरों से आएंगे, उन को भी पढ़ कर सुनाना। 7 क्या जाने वे यहोवा से गिड़गिड़ा कर प्रार्थना करें और अपनी अपनी बुरी चाल से फिरें; क्योंकि जो क्रोध और जलजलाहट यहोवा ने अपनी इस प्रजा पर भड़काने को कहा है, वह बड़ी है। 8 यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता की इस आज्ञा के अनुसार नेरिय्याह के पुत्र बारूक ने, यहोवा के भवन में उस पुस्तक में से उसके वचन पढ़ कर सुनाए। 9 और योशिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के पांचवें बरस के नौवें महीने में यरूशलेम में जितने लोग थे, और यहूदा के नगरों से जितने लोग यरूशलेम में आए थे, उन्होंने यहोवा के साम्हने उपवास करने का प्रचार किया। 10 तब बारूक ने यहोवा के भवन में सब लोगों को शापान के पुत्र गमर्याह जो प्रधान था, उसकी कोठरी में जो ऊपर के आंगन में यहोवा के भवन के नये फाटक के पास थी, यिर्मयाह के सब वचन पुस्तक में से पढ़ सुनाए। 11 तब शापान के पुत्र गमर्याह के बेटे मीकायाह ने यहोवा के सारे वचन पुस्तक में से सुने। 12 और वह राजभवन के प्रधान की कोठरी में उतर गया, और क्या देखा कि वहां एलीशमा प्रधान और शमायाह का पुत्र दलायाह और अबबोर का पुत्र एलनातान और शापान का पुत्र गमर्याह और हनन्याह का पुत्र सिदकिय्याह और सब हाकिम बैठे हुए हैं। 13 और मीकायाह ने जितने वचन उस समय सुने, जब बारूक ने पुस्तक में से लोगों को पढ़ सुनाए थे, वे सब वर्णन किए। 14 उन्हें सुन कर सब हाकिमों ने यहूदी को जो नतन्याह का पुत्र ओर शेलेम्याह का पोता और कूशी का परपोता था, बारूक के पास यह कहने को भेजा, कि जिस पुस्तक में से तू ने सब लोगों को पढ़ सुनाया है, उसे अपने हाथ में लेता आ। सो नेरिय्याह का पुत्र बारूक वह पुस्तक हाथ में लिए हुए उनके पास आया। 15 तब उन्होंने उस से कहा, अब बैठ जा और हमें यह पढ़ कर सुना। तब बारूक ने उन को पढ़ कर सुना दिया। 16 जब वे उन सब वचनों को सुन चुके, तब थरथराते हुए एक दूसरे को देखने लगे; और उन्होंने बारूक से कहा, हम निश्चय राजा से इन सब वचनों का वर्णन करेंगे। 17 फिर उन्होंने बारूक से कहा, हम से कह, क्या तू ने ये सब वचन उसके मुख से सुन कर लिखे? 18 बारूक ने उन से कहा, वह ये सब वचन अपने मुख से मुझे सुनाता गया ओर मैं इन्हें पुस्तक में स्याही से लिखता गया। 19 तब हाकिमों ने बारूक से कहा, जा, तू अपने आप को और यिर्मयाह को छिपा, और कोई न जानने पाए कि तुम कहां हो। 20 तब वे पुस्तक को एलीशमा प्रधान की कोठरी में रख कर राजा के पास आंगन में आए; और राजा को वे सब वचन कह सुनाए। 21 तब राजा ने यहूदी को पुस्तक ले आने के लिये भेजा, उसने उसे एलीशामा प्रधान की कोठरी में से ले कर राजा को और जो हाकिम राजा के आस पास खड़े थे उन को भी पढ़ सुनाया। 22 राजा शीतकाल के भवन में बैठा हुआ था, क्योंकि नौवां महीना था और उसके साम्हने अंगीठी जल रही थी। 23 जब यहूदी तीन चार पृष्ठ पढ़ चुका, तब उसने उसे चाकू से काटा और जो आग अंगीठी में थी उस में फेंक दिया; सो अंगीठी की आग में पूरी पूस्तक जल कर भस्म हो गई। 24 परन्तु न कोई डरा और न किसी ने अपने कपड़े फाड़े, अर्थात न तो राजा ने और न उसके कर्मचारियों में से किसी ने ऐसा किया, जिन्होंने वे सब वचन सुने थे। 25 एलनातान, और दलायाह, और गमर्याह ने तो राजा से बिनती भी की थी कि पुस्तक को न जलाए, परन्तु उसने उनकी एक न सुनी। 26 ओर राजा ने राजपुत्र यरहमेल को और अज्रीएल के पुत्र सरायाह को और अब्देल के पुत्र शेलेम्याह को आज्ञा दी कि बारूक लेखक और यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को पकड़ लें, परन्तु यहोवा ने उन को छिपा रखा। 27 जब राजा ने उन वचनों की पुस्तक को जो बारूक ने यिर्मयाह के मुख से सुन सुनकर लिखी थी, जला दिया, तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा कि 28 फिर एक और पुस्तक ले कर उस में यहूदा के राजा यहोयाकीम की जलाई हई पहिली पुस्तक के सब वचन लिख दे। 29 और यहूदा के राजा यहोयाकीम के विषय में कह कि यहोवा यों कहता है, तू ने उस पुस्तक को यह कह कर जला दिया है कि तू ने उस में यह क्यों लिखा है कि बाबुल का राजा निश्चय आकर इस देश को नाश करेगा, और उस में न तो मनुष्य को छोड़ेगा और न पशु को। 30 इसलिये यहोवा यहूदा के राजा यहोयाकीम के विषय में यों कहता है, कि उसका कोई दाऊद की गद्दी पर विराजमान न रहेगा; और उसकी लोथ ऐसी फेंक दी जाएगी कि दिन को घाम में ओर रात को पाले में पड़ी रहेगी। 31 और मैं उसको और उसके वंश और कर्मचारियों को उनके अधर्म का दण्ड दूंगा; और जितनी विपत्ति मैं ने उन पर और यरूशलेम के निवासियों और यहूदा के सब लोगों पर डालने को कहा है, और जिस को उन्होंने सच नहीं माना, उन सब को मैं उन पर डालूंगा। 32 तब यिर्मयाह ने दूसरी पुस्तक ले कर नेरिय्याह के पुत्र बारूक लेखक को दी, और जो पुस्तक यहूदा के राजा यहोयाकीम ने आग में जला दी थी, उस में के सब वचनों को बारूक ने यिर्मयाह के मुख से सुन सुनकर उस में लिख दिए; और उन वचनों में उनके समान और भी बहुत सी बातें बढ़ा दी गईं। दानिय्येल 9:23 23 जब तू गिड़गिड़ाकर बिनती करने लगा, तब ही इसकी आज्ञा निकली, इसलिये मैं तुझे बताने आया हूं, क्योंकि तू अति प्रिय ठहरा है; इसलिये उस विषय को समझ ले और दर्शन की बात का अर्थ बूझ ले॥


संगीत

कठिन है रास्ते बहुत, हर एक मोड़ पर खतर, अन्धेरे सायों को हटा, दिखा दे मुझको अब सहर । सहारा मुझको चाहिये, सहारा दे मुझे खुदा, मुझे सम्भाल मैं गिरा। (2)