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पाठ 34 : यीशु का रूपांतरण



सारांश

प्रभु यीशु के तीन चेले पतरस ,याकूब और यूहन्ना प्रभु से बहुत प्रेम करते थे और प्रभु के करीब थे |एक दिन प्रभु उनको एक ऊँचे पहाड़ पर ले गए और वहाँ उनके सामने प्रभु का रूपान्तर हुआ |प्रभु का वस्त्र ज्योति के समान उजला हो गया |मूसा और एल्लियाह भी महिमा के तेज में प्रभु से बाते करते हुए दिखाई दिए |वह प्रभु की मृत्यु की चर्चा कर रहे थे ,जिसकी पूर्णता यरूशलेम में होने वाली थी |उन दो पुरुषों ने पृथ्वी पर रहते समय ऊँचे पहाड़ पर परमेश्वर से बातें की थी |अब वे पृथ्वी पर आए और एक पहाड़ पर परमेश्वर के पुत्र से बातें कर रहें थे | तब एक उजले बादल ने उन्हें छा लिया ,और वे भयभीत हों गए |और बादल में से यह शब्द सुनाई दिए ,"यह हमें उस आकाशवाणी का स्मरण दिलाता है जब प्रभु यीशु का बपतिस्मा हुआ था |चेले बहुत डर गए और मुँह के बल गिर गए |प्रभु ने उन्हें छूकर कहा ,"उठो, डरो मत |" वे उठे बादल छंट चुके थे ,और उन्होंने प्रभु यीशु को छोड़ और किसी को नहीं देखा |प्रभु के साथ वे पहाड़ से उत्तर गए |कुछ वर्षों बाद पतरस अपनी पत्री में लिखते हैं कि उस दिन उन्होंने क्या देखा |


बाइबल अध्यन

मत्ती 17:1-8 1 छ: दिन के बाद यीशु ने पतरस और याकूब और उसके भाई यूहन्ना को साथ लिया, और उन्हें एकान्त में किसी ऊंचे पहाड़ पर ले गया। 2 और उनके साम्हने उसका रूपान्तर हुआ और उसका मुंह सूर्य की नाईं चमका और उसका वस्त्र ज्योति की नाईं उजला हो गया। 3 और देखो, मूसा और एलिय्याह उसके साथ बातें करते हुए उन्हें दिखाई दिए। 4 इस पर पतरस ने यीशु से कहा, हे प्रभु, हमारा यहां रहना अच्छा है; इच्छा हो तो यहां तीन मण्डप बनाऊं; एक तेरे लिये, एक मूसा के लिये, और एक एलिय्याह के लिये। 5 वह बोल ही रहा था, कि देखो, एक उजले बादल ने उन्हें छा लिया, और देखो; उस बादल में से यह शब्द निकला, कि यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं प्रसन्न हूं: इस की सुनो। 6 चेले यह सुनकर मुंह के बल गिर गए और अत्यन्त डर गए। 7 यीशु ने पास आकर उन्हें छूआ, और कहा, उठो; डरो मत। 8 तब उन्होंने अपनी आंखे उठाकर यीशु को छोड़ और किसी को न देखा।


प्रश्न-उत्तर

प्र 1 : प्रभु यीशु के साथ पहाड़ पर कौन-कौन गए ।उ 1 : प्रभु यीशु के साथ पहाड़ पर पतरस याकूब और यूहन्ना गए ।

प्र 2 : उन्हे कौन दो लोग वहाँ मिले ।उ 2 :उन्हें वहाँ मूसा और एलिय्याह मिली ।

प्र 3 : वे किस विषय पर चर्चा कर रहे थे ?उ 3 : वे प्रभु की मृत्यु की चर्चा कर रहे थे जिसकी पूर्णता यरूशलेम मे होने वाली थी ।

प्र 4 : उन्होंने क्या सुना ?उ 4 : उन्होंने यह सुना कि "यह मेरा प्रिय पुत्र है , जिससे मे प्रसन्न हूँ , इस कि सुनो"।

प्र 5 : बादल के छंट जाने पर उन्होंने किसे देखा ?उ 5 : बादल के छंट जाने पर उन्होंने सिर्फ प्रभु यीशु मसीह को देखा ।