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पाठ 33 : अच्छा सामरी



सारांश

एक मनुष्य यरूशलेम से परीहों जा रहा था | रास्ते मे डाकुओं ने उसे लूट लिपा , और मार -पीट कर उसे अधमरा छोड़ कर चले गए | उसी रास्ते से एक पाजक आपा और उस असहाप मनुष्य को देखा |परन्तु वह न रुका और न ही परवाह की | वह ऐसे चला गया जैसे कि उसने देखा ही नहीं |कुछ समय पश्चाताप एक लेवी वहाँ से निकला ,परन्तु उसने भी घायल व्यक्ति की कोई परवाह न की |उसने भी उसे देखा और अपने रास्ते चला गया | फिर एक सामरी यात्री वहाँ से निकला |जब उसने उस अधमरे व्यक्ति को देखा ,तो उस पर तरस खाया| वह अपने गदहे पर से उतरकर उसने पास आया |और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियाँ बाँधी ,और अपने गदहे पर चड़ाकर सराय में लें गया और उसकी सेवा की |अगले दिन उसने सराय के मालिक को दो दीनार देकर कहा, "इसकी सेवा करना ,और जो तेरा और खर्चा होगा, वह मैं वापस आकर दे दूँगा |" सामरी प्रभु यीशु मसीह की तस्वीर है |परमेश्वर से दूर रह कर हम भी उस घायल व्यक्ति की तरह है जो स्वयअपनी सहायता नहीं कर सकते |मात्र प्रभु यीशु मसीह जो हमारे लिए अपना प्राण देने आए ,हमे लुटेरे शैतान से बचाकर उसके दिए पाप रूपी घाव को चंगा कर सकते है |हम यह भी सीखते है कि हमे उन लोगों की सहायता करनी चाहिए जिनको उसकी आवश्यकता है |


बाइबल अध्यन

लूका 10:30-37 30 यीशु ने उत्तर दिया; कि एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था, कि डाकुओं ने घेरकर उसके कपड़े उतार लिए, और मार पीट कर उसे अधमूआ छोड़कर चले गए। 31 और ऐसा हुआ; कि उसी मार्ग से एक याजक जा रहा था: परन्तु उसे देख के कतरा कर चला गया। 32 इसी रीति से एक लेवी उस जगह पर आया, वह भी उसे देख के कतरा कर चला गया। 33 परन्तु एक सामरी यात्री वहां आ निकला, और उसे देखकर तरस खाया। 34 और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियां बान्धी, और अपनी सवारी पर चढ़ाकर सराय में ले गया, और उस की सेवा टहल की। 35 दूसरे दिन उस ने दो दिनार निकालकर भटियारे को दिए, और कहा; इस की सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे भर दूंगा। 36 अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा? 37 उस ने कहा, वही जिस ने उस पर तरस खाया: यीशु ने उस से कहा, जा, तू भी ऐसा ही कर॥


संगीत

उसने दाखरस और तेल उण्डेला मेरी आत्मा को चंगा किया यरीहो के किनारे अधमुआ पड़ा यीशु - यीशु - यीशु मैंने उसको पा लिया (3) मैंने उसको पा लिया ।


प्रश्न-उत्तर

प्र 1 : उस मनुष्य का क्या हुआ जो यरीहों जा रहा था ?उ 1 : वह मनुष्य जो यरीहों जा रहा था , रास्ते मे डाकुओं ने उसे लूत लिया और मार-पीट कर उसे अधमरा छोड़ कर चले गये ।

प्र 2 : उसके पास से गुजरने वाले दो व्यक्तियों ने क्या किया ?उ 2 : उसके पास से गुजरने वाले दोनों व्यक्तियों ने ना तो रुके और ना उसकी परवाह की ।

प्र 3 : अगला कौन आया , और उसने क्या किया?उ 3 : अगला एक समारी यात्री आया , जब उसने उस अधमरे व्यक्ति को देखा तो वह तरस खाया। वह अपने गदहे पर से उतरा और उसके पास आया । उसके घावों पर तेल और दखरस डालकर पट्टियां बांधी और अपने गदहे पर चढ़ाकर सराये मे ले गया और इसकी सेवा की ।

प्र 4 : उसने सराय के मालिक से क्या कहा ?उ 4 : अगले दिन उसने सराय के मालिक को दो दीनार देकर कहा कि वह उसकी सेवा करे और जो उसका खर्चा होगा वो सामरी सराय के मालिक को दे देगा ।

प्र 5 : इस घटना से हम क्या सीखते हैँ ?उ 5 : इस घटना से हम यह सीखतें हैं कि सामरी प्रभु यीशु मसीह कि तस्वीर है । परमेश्वर से दूर रह कर हम उस घायल व्यक्ति कि तरह हैं जो स्वयं अपनी सहायता नहीं कर सकता। मात्र प्रभु यीशु मसीह हि हमारे लिया अपना प्राण दिया और हमे लुटेरे शैतान से बचाकर उसके दिये पाप रूपी घाव को चंगा कर सकते हैं । हमे उन लोगों की सहायता करनी चाहिये जिनको उसकी आवश्यकता है ।