पाठ 31 : कनानी औरत
सारांश
प्रभ यीशु रोगियों को चंगा करते हुए और लोगों को सिखाते हुए जगह -जगह जा रहे थे |एक दिन एक कनानी स्त्री रोते हुक प्रभु के पास आकर कहनों लगी , "हे प्रभू ,दाऊद की सन्तान ,मुझ पर दपा कर ! मेरी बेटी की दुष्टात्मा बहुत सता रहा है |" प्रभु ने उसे कुछ उत्तर नही दीपा | चेलों ने प्रभु से विनती करते कहा ,"इसे विदा कर, क्योंकि वह हमारे पीछे चिल्लाती आती है |" प्रभु ने उतर दिपा , "मैं इस्राएल की खोई हुई भेड़ों के पास भेजा गया हूँ |" जब वह निरंतर विनती करती रही,तब प्रभु ने उससे कहा ,"लड़कों की रोटी लेकर कुत्तों के आगे डालना अच्छा नहीं"। उसने अपनी विनती जारी रखी और कहा ,"सत्य है प्रभु ,पर कुत्ते भी वह चूरचार खाते हैं ,जो उनके स्वामियों की मेज से गिरते हैं । "इस पर प्रभु यीशु ने उसे उत्तर दिया ,:हे स्त्री ,तेरा विश्वास बड़ा है !जैसा तू चाहती है ,तेरे लिए ववैसा ही हो । "और उसकी बेटी उसी समय स्वस्थ हो गई ।
बाइबल अध्यन
मत्ती 15:21-28 21 यीशु वहां से निकलकर, सूर और सैदा के देशों की ओर चला गया। 22 और देखो, उस देश से एक कनानी स्त्री निकली, और चिल्लाकर कहने लगी; हे प्रभु दाऊद के सन्तान, मुझ पर दया कर, मेरी बेटी को दुष्टात्मा बहुत सता रहा है। 23 पर उस ने उसे कुछ उत्तर न दिया, और उसके चेलों ने आकर उस से बिनती कर कहा; इसे विदा कर; क्योंकि वह हमारे पीछे चिल्लाती आती है। 24 उस ने उत्तर दिया, कि इस्राएल के घराने की खोई हुई भेड़ों को छोड़ मैं किसी के पास नहीं भेजा गया। 25 पर वह आई, और उसे प्रणाम करके कहने लगी; हे प्रभु, मेरी सहायता कर। 26 उस ने उत्तर दिया, कि लड़कों की रोटी लेकर कुत्तों के आगे डालना अच्छा नहीं। 27 उस ने कहा, सत्य है प्रभु; पर कुत्ते भी वह चूरचार खाते हैं, जो उन के स्वामियों की मेज से गिरते हैं। 28 इस पर यीशु ने उस को उत्तर देकर कहा, कि हे स्त्री, तेरा विश्वास बड़ा है: जैसा तू चाहती है, तेरे लिये वैसा ही हो; और उस की बेटी उसी घड़ी से चंगी हो गई॥