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पाठ 21 : सुलैमान की बुद्धि



सारांश

दाऊद का पुत्र सुलैमान कम उम्र में ही राजा बन गया |वह भी अपने पिता की तरह परमेश्वर से प्रेम करता था |एक रात परमेश्वर ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर कहा ," जो कुछ तू चाहे वह माँग |" सुलैमान ने पहले उसके पिता को ,फिर स्वयं उसे राजपद देने के लिए ,परमेश्वर को धन्यवाद दिया |फिर उसने एक अच्छे और बुरे को समझने वाला ह्रदय माँगा ताकि वह इतने महान राष्ट्र का सही न्याय करते हुए राज्य कर सके | परमेश्वर सुलैमान की विनती से बहुत प्रसन्न हुए |परमेश्वर ने सुलैमान को इतनी बुद्धि और विवेक से भरा मन दिया कि सुलैमान से पहले आउए बाद में इतना बुद्धिमान कोई नहीं हुआ | उसके साथ परमेश्वर ने उसे आदर और समृद्धि से भी भरपूर किया जो उसने नहीं माँगा था | एक दिन दो स्त्रीयाँ एक कठिन मुकदमा लेकर उसके पास आईं |दोनों के हाथ में नवजात शिशु थे , परन्तु उसमें से एक मरा हुआ था | एक स्त्री ने राजा से कहा ," हम दोनों एक ही घर में रहते हैं |रात को इस स्त्री का बच्चा मर गया और इसने अपने मरे बच्चे को मेरे पास रखकर मेरा जीवित बच्चा ले लिया | उसके हाथ में जो बालक है वह मेरा है |और मेरे माँगने पर भी वह नहीं देती |हे राजा , मेरा बच्चा मुझे दिला दीजिए !" इस पर दूसरी स्त्री ने कहा ,"नहीं ! जीवित बालक मेरा है ,और मृत बालक उसका है । " कौन बता सकता था कि कौन से स्त्री सच बोल रही थी ?यह बहुत कठिन प्रशन था ,परन्तु सुलैमान को शीघ्र ही उसका उत्तर मिल गया । उसने कहा ,"तुम लोग जीवित बालक के लिए झगड़ा कर रहे हो । एक तलवार लाओ और जीवित बालक के दो टुकड़े करो और आधा -आधा दोनों स्त्रियों को दे दो । "तभी जीवित बच्चे की माँ रोते हुए बोली ,"नहीं हे राजा ,उसे मत मारो । उसे उस स्त्री को दे दो ,चाहे वह मुझे न मिले ,तौभी उसे जीवित रहने दो । "परन्तु दूसरी स्त्री ने कहा ,वह ,"न तो तेरा हो ,न मेरा ,उसके दो टुकड़े किए जाएँ । "तब राजा समझ गया कि जीवित बालक की असली माँ कौन है । वही उसकी माँ है जिसने उस बालक को मारने नहीं दिया । राजा ने उसका बच्चा उसको दे दिया और वह संतुष्ट होकर चली गई । इस प्रकार सुलैमन ने ईसवरीय बुद्धि दिखाई । यह उसके लिए परमेश्वर का वरदान था ।


बाइबल अध्यन

1 राजा 3:4-8 4 और राजा गिबोन को बलि चढ़ाने गया, क्योंकि मुख्य ऊंचा स्थान वही था, तब वहां की वेदी पर सुलैमान ने एक हज़ार होमबलि चढ़ाए। 5 गिबोन में यहोवा ने रात को स्वप्न के द्वारा सुलैमान को दर्शन देकर कहा, जो कुछ तू चाहे कि मैं तुझे दूं, वह मांग। 6 सुलैमान ने कहा, तू अपने दास मेरे पिता दाऊद पर बड़ी करुणा करता रहा, क्योंकि वह अपने को तेरे सम्मुख जानकर तेरे साथ सच्चाई और धर्म और मन की सीधाई से चलता रहा; और तू ने यहां तक उस पर करुणा की थी कि उसे उसकी गद्दी पर बिराजने वाला एक पुत्र दिया है, जैसा कि आज वर्तमान है। 7 और अब हे मेरे परमेश्वर यहोवा! तूने अपने दास को मेरे पिता दाऊद के स्थान पर राजा किया है, परन्तु मैं छोटा लड़का सा हूँ जो भीतर बाहर आना जाना नहीं जानता। 8 फिर तेरा दास तेरी चुनी हुई प्रजा के बहुत से लोगों के मध्य में है, जिनकी गिनती बहुतायत के मारे नहीं हो सकती। 9 तू अपने दास को अपनी प्रजा का न्याय करने के लिये समझने की ऐसी शक्ति दे, कि मैं भले बुरे को परख सकूं; क्योंकि कौन ऐसा है कि तेरी इतनी बड़ी प्रजा का न्याय कर सके? 10 इस बात से प्रभु प्रसन्न हुआ, कि सुलैमान ने ऐसा वरदान मांगा है। 11 तब परमेश्वर ने उस से कहा, इसलिये कि तू ने यह वरदान मांगा है, और न तो दीर्घायु और न धन और न अपने शत्रुओं का नाश मांगा है, परन्तु समझने के विवेक का वरदान मांगा है इसलिये सुन, 12 मैं तेरे वचन के अनुसार करता हूँ, तुझे बुद्धि और विवेक से भरा मन देता हूँ, यहां तक कि तेरे समान न तो तुझ से पहिले कोई कभी हुआ, और न बाद में कोई कभी होगा। 13 फिर जो तू ने नहीं मांगा, अर्थात धन और महिमा, वह भी मैं तुझे यहां तक देता हूँ, कि तेरे जीवन भर कोई राजा तेरे तुल्य न होगा। 14 फिर यदि तू अपने पिता दाऊद की नाईं मेरे मार्गों में चलता हुआ, मेरी विधियों और आज्ञाओं को मानता रहेगा तो मैं तेरी आयु को बढ़ाऊंगा। 15 तब सुलैमान जाग उठा; और देखा कि यह स्वप्न था; फिर वह यरूशलेम को गया, और यहोवा की वाचा के सन्दूक के साम्हने खड़ा हो कर, होमबलि और मेलबलि चढ़ाए, और अपने सब कर्मचारियों के लिये जेवनार की। 16 उस समय दो वेश्याएं राजा के पास आकर उसके सम्मुख खड़ी हुईं। 17 उन में से एक स्त्री कहने लगी, हे मेरे प्रभु! मैं और यह स्त्री दोनों एक ही घर में रहती हैं; और इसके संग घर में रहते हुए मेरे एक बच्चा हुआ। 18 फिर मेरे ज़च्चा के तीन दिन के बाद ऐसा हुआ कि यह स्त्री भी जच्चा हो गई; हम तो संग ही संग थीं, हम दोनों को छोड़कर घर में और कोई भी न था। 19 और रात में इस स्त्री का बालक इसके नीचे दबकर मर गया। 20 तब इस ने आधी रात को उठ कर, जब तेरी दासी सो ही रही थी, तब मेरा लड़का मेरे पास से ले कर अपनी छाती में रखा, और अपना मरा हुआ बालक मेरी छाती में लिटा दिया। 21 भोर को जब मैं अपना बालक दूध पिलाने को उठी, तब उसे मरा हुआ पाया; परन्तु भोर को मैं ने ध्यान से यह देखा, कि वह मेरा पुत्र नहीं है। 22 तब दूसरी स्त्री ने कहा, नहीं जीवित पुत्र मेरा है, और मरा पुत्र तेरा है। परन्तु वह कहती रही, नहीं मरा हुआ तेरा पुत्र है और जीवित मेरा पुत्र है, योंवे राजा के साम्हने बातें करती रही। 23 राजा ने कहा, एक तो कहती है जो जीवित है, वही मेरा पुत्र है, और मरा हुआ तेरा पुत्र है; और दूसरी कहती है, नहीं, जो मरा है वही तेरा पुत्र है, और जो जीवित है, वह मेरा पुत्र है। 24 फिर राजा ने कहा, मेरे पास तलवार ले आओ; सो एक तलवार राजा के साम्हने लाई गई। 25 तब राजा बोला, जीविते बालक को दो टुकड़े करके आधा इस को और आधा उसको दो। 26 तब जीवित बालक की माता का मन अपने बेटे के स्नेह से भर आया, और उसने राजा से कहा, हे मेरे प्रभु! जीवित बालक उसी को दे; परन्तु उसको किसी भांति न मार। दूसरी स्त्री ने कहा, वह न तो मेरा हो और न तेरा, वह दो टुकड़े किया जाए। 27 तब राजा ने कहा, पहिली को जीवित बालक दो; किसी भांति उसको न पारो; क्योंकि उसकी माता वही है। 28 जो न्याय राजा ने चुकाया था, उसका समाचार समस्त इस्राएल को मिला, और उन्होंने राजा का भय माना, क्योंकि उन्होंने यह देखा, कि उसके मन में न्याय करने के लिये परमेश्वर की बुद्धि है।


संगीत

चुनना है तुम्हें है नौजवान जीवन या मौत का रास्ते से छोड दे हानी के सारे रास्ते लाभ का रस्ते ही चुन लेना परमेश्वर से ही प्रेम करना उसके मार्गों पर ही चलना विधियों और नियमों को मानना जिससे तू जीवित रहे और बड़े


प्रश्न-उत्तर

प्र 1 : सुलैमान को कौन सी उपाधि दी गई थी ?उ 1 : सुलैमान को ज्ञानी सुलैमान से जाना जाता है ।

प्र 2 : सुलैमान को अपना ज्ञान कहाँ से प्राप्त हुआ था?उ 2: सुलैमान कम उम्र मे ही राजा बन गया और अपने पिता की तरह परमेश्वर से प्रेम करता था । एक रात परमेश्वर ने उसको स्वपन मे दर्शन देकर कहा कि जो कुछ वो मांगे वह दिया जायगा। उसने एक अच्छे और बुरे को समझने वाला हृदय मांगा ताकि वह इतने महान राष्ट्र का सही न्याय करते हुए राज्य कर सके। परमेश्वर सुलैमान की बिनती से बहुत प्रसन हुए और उसको इतनी बुद्धि और विवेक से भरा मन दिया कि सुलैमान से पहले और बाद मे इतना बुद्धिमान कोई नहीं हुआ ।

प्र 3 : दो स्त्रीयां कीस बात पर जगडा कर रही थीं ?उ 3 : दोनों स्त्रीयों के हाथ मे एक एक नाव जात शिशु था परन्तु उस मे से एक मार हुआ था । दोनों स्त्रीयां नाव जात शिशु अपना मान रही थी और मृतक शिशु को अपना नहीं माँ रहीं थी ।

प्र 4 : सुलैमान ने असली माँ का पता कैसे लगाया ?उ 4 : जब सुलैमान ने दोनों स्त्रीयों की वारदात सुनी तो उसने एक तलवार लाने को कहा और जीवित बालक का दो टुकड़े करके दोनों स्त्रीयों को आधा-आधा देने को कहा । तभी जीवित बच्चे की माँ रोती हुई बोली कि बच्चे को मत मारो ,पर दूसरी स्त्री को दे दो ,चाहे उसे ना मिले तौभी उस बच्चे को जीवित रहने दो । जिक स्त्री का मृतक शिशु था उसने कहा कि वह बच्चा ना तो उन दोनों का ना हो इसलिये उसके दो टुकड़े कर दें । तब सुलैमान को समझ आ गया कि जीवित शिशु कि माँ कौन है ।

प्र 5 : हमें सच्चा ज्ञान कैसे प्राप्त हो सकता है ?उ 5 : हमें सच्चा ज्ञान परमेश्वर से प्राप्त हो सकता है । यदि हम भी सुलैमान की तरह परमेश्वर को पसंद आने वाले दान माँगेगे तो हुमने जो मांगा है उससे अधिक परमेश्वर हमे देगा।