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पाठ 2 : सृष्टि



सारांश

हम सीख चुके हैं कि परमेश्वर ने ही सब वस्तुओं को बनाया है, और परमेश्वर भला है और उसने जो कुछ बनाया वह अच्छा है। जगत की सृष्टि से पहले परमेश्वर था। उसने आकाश पृथ्वी को अपने वचन से बनाया और वही आरम्भ है । बाइबल कहती है कि धरती सुनसान और अंधेरे में थी और जल में डुबी हुई थी। परमेश्वर का आत्मा पृथ्वी पर मंडरा रहा था। बाइबल का पहला अध्याय हमे बताता है कि परमेश्वर ने सारी वस्तुओं को कैसे बनाया। अंधकार में एक समय परमेश्वर का शब्द सुनाई दिया, वह परमेश्वर की आज्ञा थी। परमेश्वर ने कहा ” उजियाला हो “ इब्रानी भाषा में यह केवल एक छोटी सी आज्ञी थी परन्तु शक्तिशाली थी। जब परमेश्वर बोलते हैं तो कुछ अवश्य होता है। जब परमेश्वर ने कहा कि उजियाला हो तो रोशनी आई। उसने उजियाला को दिन और अंधकार को रात कहा। वही पहला दिन था। तब परमेश्वर ने पृथ्वी के ढपे हुआ जल को उपर उठाकर बादल में बदलनेवाले जल से अलग किया और पृथ्वी के उपर एक परदा जैसा तान दिया। हम उसे आकाश कहते है और कहते हैं कि ”आकाश में बादल छाए हुए है। “ कभी कभी लोग इसे स्वर्ग भी कहते है, परन्तु ये वह स्वर्ग नहीं है जहां परमेश्वर का सिंहासन है। वह तो आकाश से बहुत ऊंचा है। फिर सांझ और सुबह हुई और वह दुसरा दिन था। तब परमेश्वर ने जल को आज्ञा दी कि एक तरफ हो जाए ताकि भूमि दिखाई दे। जब जल एक तरफ हो गया तो जमीन पहाड, नदी और समतल स्थान के साथ प्रगट हुई और दुसरे तरफ समुद्र था। उसी समय परमेश्वर ने सुखी भूमि को आज्ञा दी कि उसमें पत्तों और फुलों समेत फल और बीज उपजानेवाले पेड़ और पौधें उत्पन्न हो। हर फल मे बीज था, और हर बीज एक नया पौघा बन सकता था। और परमेश्वर ने देखा कि सब कुछ अच्छा है, वही तीसरा दिन था। और परमेश्वर ने कहा कि ” दिन, महीने और वर्षों की गिनती के लिए आकाश में ज्योतियां हो।“ उसने सूर्य को दिन के लिए और चांद तारों को रात के लिए बनाया। और परमेश्वर ने देखा कि वह अच्छा है। और वह चौथा दिन था। परमेश्वर ने कहा ”जल में से छोटे और बडे प्राणी आ जाए। और उसने कहा, ” आकाश में उड़ने के लिए पक्षी हो ।परमेश्वर ने बनाया हुआ हर प्राणी को अशीषित करते हुए कहा, ” बढ़ते जाओ“ वह पांचवा दिन था। मछलियां और पक्षियों के हो जाने के बाद परमेश्वर ने कहा! ” पृथ्वी हर प्रकार के प्राणी और रेगंनेवाले जन्तु उत्पन्न करे जो घांस पत्ते और फल खानेवाले हो। परमेश्वर ने बडे और छोटे प्राणियों को बनाया।“ हर प्राणी एक दुसरे से अलग था, फिर भी सिद्ध और अपने ढंग से जीनेवाला था। परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है, परन्तु उसकी सृष्टि का काम अभी पूरा नहीं हुआ था। परमेश्वर ने और क्या बनाया? हम अगले पाठ में देखेंगे।


बाइबल अध्यन

उत्पत्ति 1:3-25 3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया। 4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। 5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया॥ 6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए। 7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया। 8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया॥ 9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया। 10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 11 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीज वाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्ही में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया। 12 तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्ही में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 13 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया॥ 14 फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों। 15 और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देने वाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया। 16 तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया। 17 परमेश्वर ने उन को आकाश के अन्तर में इसलिये रखा कि वे पृथ्वी पर प्रकाश दें, 18 तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 19 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया॥ 20 फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें। 21 इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 22 और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें। 23 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया। 24 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात घरेलू पशु, और रेंगने वाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों; और वैसा ही हो गया। 25 सो परमेश्वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वन पशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगने वाले जन्तुओं को बनाया: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।


संगीत

यहोवा कैसा कुम्हार है मेरा यहोवा कैसा कुम्हार। सूरज बनाया चाँद बनाया । लंबा बनाया छोटा बनाया । लड़का बनाया लड़की बनाई । हाथी बनाया पंछी बनाए । मुझको बनाया आपको बना


प्रश्न-उत्तर

प्र 1: समस्त संसार और जो कुछ उसमे है ,उन सब को किसने बनाया ?उ 1 : समस्त संसार और जो कुछ उसमे है उन सब को परमेश्वर ने बनाया है ।

प्र 2 : परमेश्वर ने कैसे सब कुछ बनाया ?उ 2: परमेश्वर ने सब कुछ अपने शब्दों से बनाया ।

प्र 3 : पहले दिन से छठवें दिन तक परमेश्वर ने क्या-क्या बनाया ?उ 3: पहले दिन : रोशनी; दूसरे दिन : वायुमंडल; तीसरे दिन : सूखी भूमि और पेड़ पौधे; चौथे दिन : सूरज , चाँद और तारे ;पाँचवाँ दिन : समुंदर और उड़ाने वाले जीव ;छठवें दिन : जानवर और मनुष्य ।